Showing posts with label 2012. Show all posts
Showing posts with label 2012. Show all posts

13 March 2013

भूत रिटर्न्स (2012)

शायद राम गोपाल वर्मा इकलौते ऐसे साहसी निर्देशक हैं, जो फ्लॉप्स और आलोचनाओं के बावजूद हर साल 2-3 फिल्में बनाते हैं। 

इस फिल्म को मनीषा कोइराला की कमबैक फिल्म कह के प्रचारित किया गया था। लेकिन ये मनीषा की 'गोबैक' फिल्म साबित हो सकती है। ऐसी फिल्म से 'कमबैक' करने से किसी का भी करियर खराब  हो सकता है।

ये फिल्म राम गोपाल वर्मा निर्देशित 'भूत' (2003) का तथाकथित सीक्वल है। भूत (2003) अभिनय और तकनीक, दोनों दृष्टि से अच्छी थी। भूत रिटर्न्स इन दोनों लिहाज़ से कम से कम अच्छी नहीं कही जा सकती। डिपार्टमेंट (2011) में कैमरे से एक्सपेरिमेंट कर चुके वर्मा इस फिल्म को भी 'टेबल के नीचे' और 'पंखे के ऊपर' से शूट करते हैं। ये फिल्म 3डी  में भी रिलीज़ की गयी थी। हालांकि, मैंने इस फिल्म को 1डी (डीवीडी) में देखा।

पूरी फिल्म एक घर के इर्द गिर्द घुमती है। "दुनिया में करोड़ों घर होते हैं, लेकिन पता नहीं क्यों कुछ ही घरों को भूत पसंद करते है," जैसा की इस फिल्म में बताया गया है। ये घर उन्ही में से एक है। इस घर में एक कपल अपने बच्चों के साथ अभी अभी शिफ्ट हुए हैं। घर में आने के बाद उनके साथ अजीबोगरीब घटनाएं होने लगती है। 

ये फिल्म कहीं कहीं बहुत ज्यादा फनी हो गयी है। और इस तरह की फिल्मों के साथ ऐसा अक्सर हो जाता है। राम गोपाल वर्मा ने बिना स्क्रिप्ट के बहुत सी हॉरर फिल्में बनायी हैं और ये फिल्म भी अपवाद नहीं है। 

रेटिंग: *1/2

29 December 2012

अता पता लापता (2012)

यहाँ सब कुछ है लापता

राजपाल यादव को कॉमेडी करते हमने खूब देखा है। शुरुआत उन्होंने विलेन के रोल से की। 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूँ', 'मैं मेरी पत्नी और वो', 'लेडीज टेलर' और 'अंडर ट्रायल' जैसी फिल्मों में उन्होंने मुख्य भूमिका भी निभायी। इस फिल्म में उन्होंने 'एक्टिंग' की है? स्टोरी लिखी, म्यूजिक कंपोज़ की, प्रोड्यूसर और डायरेक्टर भी बने।

उन्होंने टीवी और फिल्मों में छोटे-छोटे रोल करने वाले एक्टर्स को लिया, तो आशुतोष राणा जैसे सीनियर कलाकार को भी। आशुतोष जैसे बेहतरीन अभिनेता ने ये फिल्म किस मजबूरी में की, मुझे नहीं पता।

राजपाल और उनके सहयोगी कलाकार 'मकान चोरी होने' जैसी बेतुकी बात को लेकर गला फाड़ते रहे और मेरा सर दर्द बढ़ता रहा। हर 5 मिनट के बाद राजपाल अपने नौटंकी मण्डली के साथ 'अता पता लापता' करते रहे। 'एक्शन' बोलने के बाद शायद वो सेट से उठ के कहीं चले गए थे।

सेंसर बोर्ड को इस फिल्म को बैन कर देना चाहिए था। या फिर डिस्क्लेमर डाल देना चाहिये था कि 'ये फिल्म जनता के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है'। निश्चित ही ये मेरे जीवन की WORST फिल्म है। राजपाल अगर एक्टिंग तक ही सिमित रहें तो बेहतर होगा।

रेटिंग: 0

24 December 2012

दबंग 2 (2012)

वन मैन शो

चुलबुल 'कुंग फू' पांडे (सलमान) का तबादला कानपुर होता है, या शायद उसने खुद ही लिया है। जैसा की मक्खी (अरबाज़ खान) अपने बाप से कहता है। गुंडों की हड्डी तोड़ पिटाई करके एक स्कूली बच्चे के अपहरण और एक क़त्ल की घटना को वो चुटकी में सोल्व कर देता है। 

यह फिल्म 2010 की सुपरहिट ब्लॉकबस्टर दबंग का सीक्वल है। हालांकि ये सीक्वल कम, और रीमेक ज्यादा लगती है। दबंग से सलमान एक ब्रांड बनकर उभरे और उसके बाद उनकी तीनों फिल्में (रेडी, बॉडीगार्ड और एक था टाइगर) ज़बरदस्त हिट रही। हिट का मतलब आजकल '100 करोड़ क्लब' में शामिल होना होता है। और जिस तरह टिकट रेट्स बढ़ाये गए और अगले 2 हफ़्तों तक कोई बड़ी रिलीज़ नहीं होने वाली थी, उससे अंदाज़ा लगाया गया था की ये फिल्म आसानी से '200 करोड़ क्लब' में शामिल होगी।

बहरहाल, इस फिल्म में रोमांस और एक्शन पर ज्यादा फोकस किया गया है। मिसेज पांडे (सोनाक्षी सिन्हा) अब प्रेगनेन्ट हैं और छोटे पांडेजी के आने में अब उतना ही टाइम है, जितना लगता है। दबंग की तरह इस फिल्म में भी काफी वन लाइनर्स हैं, जिसपे सलमान के 'डाइ हार्ड' फैंस जी भर के हँसते और तालियाँ पिटते हैं।

पांडेजी के सौतेले बाप और भाई भी अब उसी के साथ रहते हैं। मक्खी अब सुधर गया है और प्रजापति पांडे (विनोद खन्ना) अपनी बीवी की यादों में डूबे रहते हैं। चुलबुल द्वारा अपने बाप को छेड़ना काफी घटिया है।  फिल्म का म्यूजिक (दबंग की तुलना में) भी कमजोर है, और पुराने धुनों और दबंग की कॉपी के अलावा और कुछ नहीं है।

अरबाज़ ने सलमान के अलावा किसी एक्टर्स को उभरने का मौका नहीं दिया। और यही फिल्म का कमज़ोर पक्ष है। हाँ, दीपक डोबरियाल जरुर कुछ प्रभावित करते हैं। रही बात स्टोरी की तो आप फिल्म में स्टोरी और एक्टिंग ढूंढ़ते रह जायेंगे। लेकिन सलमान के फैन्स को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वैसे भी वे लोग स्टोरी या एक्टिंग नहीं, बल्कि सलमान, सिर्फ सलमान को देखने जाते हैं। इस मायने में अब वो नॉर्थ के रजनीकांत बन चुके हैं। 

रेटिंग: **