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27 January 2014

जय हो (2014)

एक्शन पोर्न 

हॉलीवुड सुपरहीरोज और सुपरस्टार रजनी की फिल्मों की तरह एक सलमान खान फिल्म को रिव्यु की ज़रुरत नहीं पड़ती। लोग इसे किसी भी हालत में पसंद करेंगे।

बॉलीवुड में एक दौर था जब वक़्त से काफी आगे की फिल्में बनती थी। लेकिन पिछले कुछ सालों से वक़्त से काफी पीछे की फिल्में बन रही है। इनमें से ज्यादातर फिल्में रीमेक्स या सीक्वल होती है, जिसकी कहानी १९८० या '९० के दशक की होती है। जय हो उसी सीरीज की एक कड़ी है। 

जय हो, साउथ की फिल्म स्टालिन की रीमेक है, जो हॉलीवुड फिल्म पे इट फॉरएवर से इंस्पायर्ड थी। देसी सुपरहीरो सलमान ने इस फिल्म में एक आम आदमी की भूमिका निभायी है, जिसके अंदर ज़ुल्म और अत्याचार होता देख अंदर का शेर जाग उठता है। वास्तव में, जय हो एक एक्शन पोर्न है, जिसमें सलमान हर ५ मिनट बाद, शेर की दहाड़ के साथ, गुंडों की हड्डियां तोड़ते नज़र आते हैं। 

भाई कहते हैं कि थैंक यू मत बोलो। इसके बदले तीन लोगों की मदद करो, और उनसे आगे तीन लोगों की मदद करने को कहो। फिल्म के सभी पात्र इसे अनगिनत बार दोहराते हैं। ऐसे में आपको लगता है कि आप थिएटर से निकलने के बाद तीन लोगों को फिल्म ना देखने के लिए बोलें, और उनसे कहें कि वो आगे तीन लोगों को फिल्म देखने के लिए मना करे। 

आखिरकार, एंड क्रेडिट्स शुरू होता है। और यही फिल्म की सबसे अच्छी बात थी। 

रेटिंग: *

24 December 2012

दबंग 2 (2012)

वन मैन शो

चुलबुल 'कुंग फूपांडे (सलमान) का तबादला कानपुर होता है, या शायद उसने खुद ही लिया है। जैसा की मक्खी (अरबाज़ खान) अपने बाप से कहता है। गुंडों की हड्डी तोड़ पिटाई करके एक स्कूली बच्चे के अपहरण और एक क़त्ल की घटना को वो चुटकी में सोल्व कर देता है। 

यह फिल्म 2010 की सुपरहिट ब्लॉकबस्टर दबंग का सीक्वल है। हालांकि ये सीक्वल कम, और रीमेक ज्यादा लगती है। दबंग से सलमान एक ब्रांड बनकर उभरे और उसके बाद उनकी तीनों फिल्में (रेडी, बॉडीगार्ड और एक था टाइगर) ज़बरदस्त हिट रही। हिट का मतलब आजकल '100 करोड़ क्लब' में शामिल होना होता है। और जिस तरह टिकट रेट्स बढ़ाये गए और अगले 2 हफ़्तों तक कोई बड़ी रिलीज़ नहीं होने वाली थी, उससे अंदाज़ा लगाया गया था की ये फिल्म आसानी से '200 करोड़ क्लब' में शामिल होगी।

बहरहाल, इस फिल्म में रोमांस और एक्शन पर ज्यादा फोकस किया गया है। मिसेज पांडे (सोनाक्षी सिन्हा) अब प्रेगनेन्ट हैं और छोटे पांडेजी के आने में अब उतना ही टाइम है, जितना लगता है। दबंग की तरह इस फिल्म में भी काफी वन लाइनर्स हैं, जिसपे सलमान के 'डाइ हार्ड' फैंस जी भर के हँसते और तालियाँ पिटते हैं।

पांडेजी के सौतेले बाप और भाई भी अब उसी के साथ रहते हैं। मक्खी अब सुधर गया है और प्रजापति पांडे (विनोद खन्ना) अपनी बीवी की यादों में डूबे रहते हैं। चुलबुल द्वारा अपने बाप को छेड़ना काफी घटिया है।  फिल्म का म्यूजिक (दबंग की तुलना में) भी कमजोर है, और पुराने धुनों और दबंग की कॉपी के अलावा और कुछ नहीं है।

अरबाज़ ने सलमान के अलावा किसी एक्टर्स को उभरने का मौका नहीं दिया। और यही फिल्म का कमज़ोर पक्ष है। हाँ, दीपक डोबरियाल जरुर कुछ प्रभावित करते हैं। रही बात स्टोरी की तो आप फिल्म में स्टोरी और एक्टिंग ढूंढ़ते रह जायेंगे। लेकिन सलमान के फैन्स को इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। वैसे भी वे लोग स्टोरी या एक्टिंग नहीं, बल्कि सलमान, सिर्फ सलमान को देखने जाते हैं। इस मायने में अब वो नॉर्थ के रजनीकांत बन चुके हैं। 

रेटिंग: **

1 September 2012

एक था टाइगर (2012)

एक साधारण सी कहानी के बावजूद अगर फिल्म २०० करोड़ रूपये का बिज़नेस कर पाती है, तो इसे बेशक सलमान खान का ही कमाल माना जाएगा। दबंग से सलमान एक ब्रांड बनकर उभरे हैं। एक था टाइगर, सलमान की लगातार चौथी फिल्म है जो '१०० करोड़ क्लब' में शामिल हुयी है। सलमान की पिछली फिल्मों की तरह हम यहाँ भी कहानी और अभिनय ढूंढ़ते रह जाते हैं। लेकिन रेडी और बॉडीगार्ड (२०११) की तुलना में यह कम 'ओवर एक्टेड' फिल्म है।

फिल्म का ट्रेलर देखने के बाद हमें लगा था कि ये एक स्पाई-थ्रिलर होगी। फिल्म के शुरूआती दृश्यों से हमें ऐसा लगता भी है। टाइगर (सलमान खान), एक रॉ जासूस, बॉण्ड मूवीज की तर्ज़ पर एक मिशन से लौटता है और नए मिशन पे लग जाता है। १२ सालों से उसने एक भी छुट्टी नहीं ली है, और एक के बाद एक मिशन में लगा रहता है।

लेकिन फिल्म जल्द ही एक रोमांटिक मोड़ ले लेती है। टाइगर को दुश्मन मुल्क (पाकिस्तान) की जासूस से प्यार हो जाता है। टाइगर, जो हमेशा दिमाग से सोचता था, इस बार अपने दिल की सुनता है। दोनों मुल्कों की खुफिया एजेंसीज उनके पीछे लग जाती है। लेकिन फिल्म के अंत तक वो उनको पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाते हैं।

कबीर खान की काबुल एक्सप्रेस (२००६) और न्यू यॉर्क (२००९) एक शानदार फिल्म थी। लेकिन इस फिल्म में वो कुछ अलग नहीं कर पाए। फिल्म के हीरो सलमान खान हैं, और जाहिर है यहाँ कुछ अलग करने की गुंजाईश ख़त्म हो जाती है।

फिल्म एक ऐसी मोड़ पे आके ख़तम होती है जहां से इसके सीक्वल की गुंजाईश बढ़ जाती है। यशराज को निश्चित ही इसके सीक्वल की प्लानिंग करनी चाहिए।

रेटिंग: ***